Joe bidden full biography in hindi joe bidden biography in hindi joe बिडेन जीवनी हिंदी में


 

दोस्तों कल्पना करिए कि एक लड़का है जो मिडल क्लास फैमिली से बिलॉन्ग करता है वह पढ़ाई लिखाई में बहुत ज्यादा कमजोर हैऔर कभी भी अच्छे मार्क्स नहीं लेकर आता और सिर्फ इतना ही नहीं उसको हकलाने की भी समस्या है जिसकी वजह से वह ठीक से बोल भी नहीं पाता अब अगर आप से पूछा जाए कि ऐसे लड़के का भविष्य क्या होगा और क्या वह अपनी लाइफ में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर पाएगा तो फिर आप क्या कहेंगे यकीनन किसी भी इंसान को यही लगेगा कि वह लड़का अपनी लाइफ में ज्यादा कुछ खास नहीं कर पाएगा लेकिन उसको हम आपको बता दें कि अगर वह लड़का मेहनत करी तो वह अमेरिका का प्रेसिडेंट बन सकता है जी आपने बिल्कुल सही सुना क्योंकि इस समय जिस 


लड़के की हम बात कर रहे हैं उसका नाम है जो बिडेन और दोस्तों आज की हमारी इस article में हम आपको जो बिडेन के शुरुआती जीवन से लेकर उनके संघर्ष और प्रेसिडेंट बनने तक की पूरी कहानी बताएंगे तो चलिए शुरू करते हैं दोस्तों हाल ही में अमेरिका के 46 में राष्ट्रपति बने jo biden का जीवन बहुत ही ज्यादा कठिनाइयों दुख और संघर्षों से भरा हुआ है और वह खुद इस बात की एक जीती जागती मिसाल है कि इंसान अगर ईमानदारी से काम करते हुए मेहनत करता रहे तो एक न एक दिन उसे कामयाबी जरूर मिलती है



    1. real name  Joseph Robinette Biden Jr
    2. mother's nameCatherine Eugenia Finnegan
    3. nick name  of 
    joe bidden
    Big-hearted Joe
    Uncle Joe
    Amtrak Joe
    Sleepy Joe
    Sloppy Joe
    Mr. Magoo
    4. height\ 6' (1.83 m)
    और ब्रिटेन की भी इस कामयाबी के पीछे उनके जीवन भर की मेहनत और कड़ा संघर्ष छिड़ा हुआ है दरअसल ब्रिटेन की संघर्ष भरी कहानी की शुरुआत होती है 20 नवंबर 1942 से क्योंकि इसी दिन पेंसिलवेनिया राज्य के 10 शहर में उनका जन्म हुआ था जन्म के समय जो बिडेन का पुरा name जोसेफ रैबिट एंड जूनियर रखा गया था जबकि उनके पिता का नाम जोसेफ रिटन बाय सीनियर था उनकी फैमिली में उनके दो भाई और एक बहन भी थी और चार भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं और फैमिली में पैदा हुए थे क्योंकि उनके पिता और व्यापार करते थे पिता का काम बहुत ही अच्छा था लेकिन उनके जन्म होने के बाद से ही उनके पिता कोविड-19 का या फिर सहयोग की दुनिया में आते ही उनके पिता का काम पूरी तरह से बंद हो गया और काम बंद होने के बाद से उनके पिता नौकरी की तलाश में निकल पड़े थे और दोस्तों हालात को देखते हुए अपनी फैमिली के लिए कोई भी छोटी सी नौकरी करने के लिए भी तैयार थे लेकिन उस समय की मंदी का दौर चल रहा था इसी वजह से उन्हें नौकरी मिलना बहुत ही मुश्किल हो गया और जब तक

     उनके पिता नौकरी की तलाश करते रहे तब तक उन्होंने अपना बचपन अपने नाना नानी के वहां रहकर गुजारा और फिर आखिरकार सन 1953 के पिता को जॉब मिल गई थी जिसकी वजह से उनकी पूरी फैमिली की पूरी फैमिली कई सालों तक एक छोटे से अपार्टमेंट में रहती थी और इसी शहर में हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की और परिस्थितियों की वजह से बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में बहुत कमजोर थी और वह काफी मेहनत करने के बाद भी अच्छे अंक प्राप्त नहीं कर पाते लेकिन पढ़ाई में कमजोर थी और वह भी और बहुत ही अच्छा खेला करते थे और इन दोनों ही खेलों में टीम का हिस्सा हुआ करते थे और खेलों के अलावा भी मौजूद थे और इसीलिए उन्हें उनकी क्लास का बनाया गया था और उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि जिस लड़के को बनाया जा 

    रहा है आगे का बहुत शौक था लेकिन वह अपनी समस्या की वजह से देते हुए ठीक से नहीं बोल पाते थे और वह जब भी बड़े-बड़े लेते हुए थे उनका भी देने के लिए करता था लेकिन उनके हकलाने की वजह से स्पीच के दौरान ही उनका मजाक बनाने लगे थे और नहीं बल्कि नॉर्मल बातचीत करने में भी उन्हें बहुत ही ज्यादा समस्या होती थी और उनके आने की वजह से उनको चढ़ाया जाता था और अपने इस समस्या को दूर करने के लिए बहुत ही ज्यादा मेहनत करते थे और उन्होंने बताया था कि वह अपनी हकलाने की समस्या को दूर करने के लिए शीशे के सामने खड़े होकर कई कई घंटे तक कविताएं पढ़ा करते थे इसके अलावा अपनी जुबान पर एक 

    पत्थर भी बोलने की प्रैक्टिस किया करते थे इसी तरह से मेहनत करने के बाद अपनी समस्या से छुटकारा पाने में कामयाब हो गए और फिर आगे चलकर साल 1961 में हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की और उनके पिता का काम भी काफी स्टेबल हो गया घर खरीद लिया था जिसके बाद उनका पूरा परिवार हो गया उनके पिता ने विल्मिंगटन शहर में घर खरीद लिया था जिसके बाद उनका पूरा परिवार प्लांट से विल्मिंगटन शिफ्ट हो गया और दोस्तों इसके बाद अब ब्रिटेन ने यूनिवर्सिटी आफ डेलावेयर में एडमिशन ले लिया और वहां उन्होंने हिस्ट्री और पॉलिटिकल साइंस की 

    पढ़ाई शुरू कर दी लेकिन पढ़ाई लिखाई में उनका जो हाल स्कूल में हुआ करता था वही यूनिवर्सिटी में भी रहा क्योंकि साल 1965 में 1 डिग्री प्राप्त करने में तो सफल हो गए थे लेकिन 628 की थी और उनको c  grade  दिया गया था इसके बाद यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया और यहां उन्होंने लॉ की पढ़ाई करनी शुरू कर दी और यूनिवर्सिटी में उनकी मुलाकात हुई थी 1966 में पढ़ाई पूरी होने से पहले ही दोनों ने शादी कर ली और आगे चलकर नौकरी प्राप्त कर ली लेकिन इस बार भी उन्होंने ही किया था इस बार उनकी क्लास में थी और इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पढ़ाई लिखाई में बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी या नहीं थी एक जबरदस्त लीडर बनने की सभी खूबियां मौजूद थी और वह खुद भी अपनी प्रतिभा को अच्छी तरह से पहचानते थे और इसीलिए उन्होंने पॉलिटिक्स 

    और फिर आगे कुछ सालों के बाद 1970 में लिया गया जिसके बाद तक सेवा करते रहे और उनके लीडरशिप क्वालिटी से काफी प्रभावित हुए थे और लोगों ने सुझाव दिया था कि अगले चुनाव की तैयारी शुरू कर दी कुछ ऐसा हुआ जिसने उन्हें पूरी तरह से दिन और उनकी 1 साल की बेटी की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई दुर्घटना में उनके दोनों बेटे को बेहद गंभीर चोट आई थी और अचानक हुई इस दुर्घटना को पूरी तरह से तोड़ दिया था और उन्होंने कुछ समय के लिए पॉलिटिक्स को छोड़कर समय के लिए पॉलिटिक्स को छोड़कर अपने बेटों की परवरिश पर ध्यान देंगे लेकिन उस समय के सीनेटर माइक मिल्स फील्ड ने वार्डन को समझाया कि वह चुनाव से पीछे न हटे और चुनाव को जरूर लड़ने वाला की बाइक को काफी मेहनत करनी पड़ी लेकिन उन्होंने आखिरकार 18 को चुनाव लड़ने पर राजी कर लिया इसके बाद ब्रिटेन ने चुनाव लड़ा और सिर्फ 30 साल की उम्र में ही अमेरिका 

    के छठे सबसे कम उम्र के सीनेटर बंद है और साल 1973 से 2009 तक वह सीनेटर के पद पर ही कार्य करते रहें और दोस्तों से रहते हुए अपने काम से सभी को बहुत प्रभावित किया वह हमेशा उन मुद्दों पर ध्यान देते थे जिससे की आम नागरिकों को फायदा पहुंचे और उनके इसी काम का इनाम उन्हें साल दो 2009 में उस समय मिला जब उन्हें बराक ओबामा के वाइस प्रेसिडेंट का पद दिया गया सेवा और इस तरह सेवा अमेरिका के 47 में वाइस प्रेसिडेंट बन गए दरअसल बराक ओबामा और ब्रिटेन एक-दूसरे के काफी करीबी माने जाते हैं और कई बार दोनों को एक दूसरे की तारीफ करते हुए भी देखा जा सकता है और दोस्तों इस बार यानी कि 2020 के प्रेसिडेंट चुनाव में भी ओबामा बाइट इन के सपोर्ट में कैंपेनिंग करते हुए नजर आए थे वैसे आपको बता दें कि वार्डन 2020 के प्रेसिडेंट इलेक्शन लड़ने के बारे में शोर नहीं थे और काफी सोच विचार करने के बाद उन्होंने यह

    फैसला लिया था और अब जब कि वह अमेरिका के प्रेसिडेंट लगभग बन चुके हैं तो हम यह कह सकते हैं कि उनका फैसला बिल्कुल सही था और दोस्तों वादा किया था कि अगर वह प्रेसिडेंट बनते हैं तो सबसे पहले क्लाइमेट चेंज प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसे गंभीर मुद्दों का हल निकालने पर काम करेंगे क्योंकि उनकी नजर में यह मुद्दे उतने ही ज्यादा इंपोर्टेंट है जितना कि देश के नामी और इसके साथ ही भारत को लेकर भी कहा था कि वह भारत के सभी आम मुद्दों का हल निकालने में भारत का साथ देंगे ताकि हम भी यही उम्मीद करते हैं कि टंकी प्रेसिडेंट बनने के बाद भारत और अमेरिका के पहले से और भी ज्यादा मजबूत होंगे तो दोस्तों हमें तो बस इतना ही था आपको हमारी यह वीडियो कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा साथी देखने के लिए टाइप करें और बोलिए गा आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

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