एक मशहूर कहावत है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है दुनिया में ऐसे बहुत से स्पेशल लोग हैं जिन्होंने इस कहावत को सच करके दिखाया है और अभी हाल ही में इस लिस्ट के अंदर हमारी भारतीय टीम के एक नए उभरते हुए सितारे का नाम भी जुड़ गया है दरअसल हम बात कर रहे हैं भारतीय क्रिकेट टीम के युवा तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज के बारे में जी हां दोस्तों वही सिराज जो अपने पिता की मृत्यु होने पर भी सीरीज को खत्म किए बिना भारत नहीं लौटे और अपनी जबर्दस्त गेंदबाजी के दम पर ऑस्ट्रेलिया जैसी
मजबूत टीम को उन्हीं के घर में धूल चटा दी वैसे आज भले ही सिराज कामयाबी की बुलंदियों को छू रहे हैं लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने जो मेहनत और लगन किया है वह हर एक इंसान के बस की बात नहीं है और इसीलिए आज की हमारी इंटरेस्टिंग article में भी हम आपको सिराज कि उसे संघर्ष जीवन की कहानी के बारे में बताने वाले हैं
Mohammed siraj birth date
मोहम्मद सिराज का जन्म 13 मार्च 1994 के दिन हैदराबाद शहर में रहने वाले एक गरीब परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम मोहम्मद हैदराबाद शहर में ऑटो रिक्शा चलाने का काम करते थे जबकि उनकी माता शबाना बेगम मुश्किल परिस्थितियों में लोगों के घर-घर जाकर एक नौकरानी का काम किया करती थी
मोहम्मद सिराज 2021 में 27 साल के हैं
Mohammed siraj brother
परिवार में सिराज के अलावा उनके बड़े भाई मोहम्मद इस्माइल भी हैं जो कि इस समय एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है लेकिन उस टाइम तक सिराज के घर की इनकम का मुख्य स्रोत उनके पिता का रिक्शा चलाने का ही काम हुआ करता था जिसके चलते उनके घर की आर्थिक स्थिति हमेशा ही बहुत ज्यादा कमजोर रहती थी
क्रिकेट खेलने का शौक
उनका परिवार बहुत लंबे अरसे तक हैदराबाद शहर के बंजारा हिल्स इलाके के एक छोटे से किराए के मकान के अंदर और सिराज ने भी अपना पूरा बचपन इसी घर में ही रह कर बताया था हालांकि क्रिकेट खेलने का शौक उन्हें बचपन से ही लग गया था और अक्सर वह अपने स्कूल की क्लासेस को बंद करके क्रिकेट खेला करते थे और इस खेल के चक्कर में कई बार उनके रिजल्ट भी काफी खराब है और इसकी वजह से उन्हें अपने पिता से डांट भी सुनने को मिलता था हालांकि सिराज के बड़े भाई को उनके लाजवाब टैलेंट का पता था इसलिए वह हमेशा ही उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए सपोर्ट करते थे यह बात सिराज अपने इंटरव्यू में खुद कह चुके हैं यह उनके भाई की ही मेहरबानी है कि आज भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेल रहे हैं असल में सिराज ने खुद का
भी प्रोफेशनल क्रिकेट खेलने का ख्वाब नहीं देखा था लेकिन बड़े भाई स्माइल को अपने छोटे भाई का हुनर बहुत कम उम्र में ही नजर आ गया था और उन्होंने यह तय कर लिया था कि चाहे जो भी हो जाए लेकिन वह सिराज कोई क्रिकेटर जरूर बनाएंगे सिराज ने अपने स्कूल की पढ़ाई हैदराबाद के ही साफा जूनियर स्कूल से की थी और जो कि उन्होंने क्रिकेट को ही अपना पूरा जीवन समर्पित करने का मन बना लिया था इसलिए वह सिर्फ 12वीं क्लास तक की ही पढ़ाई कर पाए सिराज के बारे में बहुत कम लोग यह जानते हैं कि बचपन में जब उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था तब वह गेंदबाजी नहीं बल्कि बल्लेबाजी करना ज्यादा पसंद करते थे लेकिन एक दिन जब वो अपने कुछ दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे तब उनके एक करीबी दोस्त ने सलाह दी कि उन्हें बैटिंग छोड़कर अपनी बोलिंग पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि उनकी बॉलिंग उनकी बैटिंग से कई गुना बेहतर है और अपने दोस्त की यह बात सच में बैठ गई और उन्होंने उसी दिन बैटिंग छोड़कर अपना पूरा फोकस अपनी पर लगा दिया आज भी अपने दोस्त की सलाह के लिए उसका शुक्रिया अदा करते हैं क्योंकि अगर वह सिराज कॉलिंग करने की सलाह नहीं देता तो फिर शायद आज हम उनकी बात कर ही नहीं रहे होते
आर्थिक स्थिति:ख़राब
अपने करियर में कामयाब होने से पहले सिराज ने बहुत ज्यादा गरीबी में अपना जीवन बिताया था और एक समय उनकी हालत इतनी ज्यादा खराब थी कि उनके पास प्रेक्टिस करने के लिए एक रियल क्रिकेट बॉल खरीदने के भी पैसे नहीं हो पाते थे इसकी प्रैक्टिस किया करते थे आपको यह जानकर काफी हैरानी होगी कि क्रिकेट एकेडमी के लिए नहीं और ना ही बचपन में उन्हें कभी किसी के पास कभी भी इतने पैसे हो ही नहीं पाए किसी क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन कर सके ऐसा खेल है बहुत ही ज्यादा इंपोर्ट माना जाता है खासतौर से जवाब क्रिकेट खेलना सीख रहे हो तब तो कोचिंग लेने का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है लेकिन सिराज ने यह बात साबित करके दिखाया कि अगर इंसान के अंदर जरूर हो तो फिर वह बिना किसी क्रिकेट एकेडमी के भी उनसे ही मेहनत करके आ सकता है अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए दिन रात मेहनत किया करते थे और उन्होंने यह बात कही थी कि उनके
पिता उनके परिवार को पालने के लिए पिछले 30 साल से ऑटो चला रहे हैं इसलिए वे चाहते हैं कि उन्हें जल्द से जल्द कामयाबी मिल जाए ताकि वह अपने पिता को अब इस उम्र में थोड़ा सा आराम दे सकें एक मौके की तलाश थी और वह मौका उन्हें 2015 में मिल गया उन्हें हैदराबाद के चारमीनार का न्योता दिया और फिर आज ने भी इस ऑफर को एक्सेप्ट करके उसको तुरंत कर लिया अब के लिए खेलते हुए उन्होंने अपनी परफॉर्मेंस बहुत ही ज्यादा इंप्रेस किया और इसकी वजह से ही उनका नाम के संभावित खिलाड़ियों में आने लगा था कि आगे कई मौके मिले
लेकिन उन्होंने खुद को बेहतर बनाने में अपना पूरा समय बिताया और फिर आखिरकार उनकी यह मेहनत रंग लाई 15 नवंबर 2015 के दिन उन्होंने हैदराबाद के लिए अपने करियर का पहला मैच खेला यह पहला मैच उनके लिए कुछ खास नहीं रहा जिसके चलते उसका और कोई भी मैच नहीं खेल पाए लेकिन राही अगला सीजन उनके करियर के लिए सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ उन्होंने कुल 9 मैच खेले 9 मैचों में 41 विकेट चटका कर जबरदस्त की वजह से ही आईपीएल 2017 की आईपीएल में हैदराबाद टीम के द्वारा यहां पर गौर करने वाली बात यह थी कि सिर्फ रखा गया था और उनके करियर का पहला आईपीएल सीजन होने वाला था लेकिन इसके बावजूद भी खरीदा जाना उनके लिए बहुत ही बड़ी उपलब्धि थी इन पैसों से पहले तो अपने माता-पिता के लिए घर लिया अपना पूरा जीवन बिताया था और शिरा चाहते थे कि अब उनके पेरेंट्स को थोड़ा इंजॉय करें
सिराज ने टी 20 का पहला मैच कब खेला था?
पहले आईपीएल में खेले 6 मैचों में 10 विकेट चटका कर उन्होंने अपने सभी को काफी प्रभावित किया इसके अलावा विजय हजारे ट्रॉफी में भी उनकी परफॉर्मेस बहुत ही ज्यादा अच्छी रही थी अगर बात करें तो भारतीय टीम में खेलने का उनका सपना पूरा हुआ उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ एक जगा दी गई थी इसके अलावा उन्होंने अपना
सिराज ने पहला एकदिवसीय मैच कब खेला था?
पहला एकदिवसीय मैच 15 जनवरी 2019 के दिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था अब यहां तक यह बात तो सभी को समझ आ चुकी थी कि सिराज एक जबरदस्त बॉलर है और आने वाले समय में वह टीम के अहम गेंदबाजों में से एक हो सकते हैं लेकिन भारतीय टीम के लिए उनका बेस्ट परफॉर्मेंस आना अभी बाकी था और उनकी यह परफॉर्मेंस उस समय सामने आई जब उन्हें 2020 21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय टेस्ट टीम में जगह दी गई
siraj father's death
जैसा कि आप सभी जानते ही होंगे उनके ऑस्ट्रेलिया जाने के सिर्फ कुछ दिन के बाद ही उनके पिता का देहांत हो गया था और इस तरह से पिता का अचानक देहांत हो ना फिर आज के लिए उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दुख था हालांकि वे चाहते तो सीरीज को छोड़कर भारत वापस आ सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि उनके पिता का ही सपना था कि उनका बेटा 1 दिन भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेले अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए और इतना बड़ा दुख झेलने के बाद भी टेस्ट सीरीज में उन्होंने जिस तरह की बोलिंग की उसको देखकर सभी हैरान रह गए थे और अपनी शानदार परफॉर्मेंस की कहानी एक ऑटो ड्राइवर के बेटे से भारतीय क्रिकेट टीम में अपनी जगह बनाले
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