Sachin tendulkar full biography in hindi || सचिन तेंदुलकर की पूरी जीवनी हिंदी में

 दोस्तों भारत में क्रिकेट को एक खेल ही नहीं बल्कि एक धर्म का दर्जा दिया गया है और उस धर्म में सचिन भगवान की तरह पूजे जाते हैं दोस्तों सचिन युवा क्रिकेटर हैं जिसने भारतीय क्रिकेट को एक नई ऊंचाई दी और क्रिकेट के खेल को घर-घर तक पहुंचा दिया एक समय तो ऐसा था कि सचिन के आउट होते ही आधा भारत टीवी बंद कर देता था और क्रिकेट में सचिन को भगवान का दर्जा देना शायद इसलिए भी सही है क्योंकि अगर रिकॉर्ड की बात करें तो सचिन के आस पास भी कोई नहीं भटकता सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड हो या शतक मारने का या फिर चौका लगाने का ही क्यों ना हो सचिन हर रिकॉर्ड में सबसे आगे हैं




    1. real name  Sachin Ramesh Tendulkar
    2. father's name ramesh tendulkar
    3. wife's name   anjali tendulkar 
    4. mother's name rajni tendulkar
    5. birth 24 April 1973 (age 47)
    6. son and daughter daughter :Sara  son Arjun


    भारत रत्न से सम्मानित

    एक बार तो सचिन तेंदुलकर की तारीफ में एक ऑस्ट्रेलियन प्रशंसक ने कहा कि अपराध तब करो जब सचिन बैटिंग कर रहा हो क्योंकि भगवान भी उस समय उनकी बैटिंग देखने में व्यस्त होते हैं सचिन भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित होने वाले पहले खिलाड़ी हैं इसके अलावा उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है सचिन एक अच्छे खिलाड़ी होने के साथ ही साथ एक अच्छे इंसान भी हैं वह हर साल 200 बच्चों के पालन पोषण की

    सचिन तेंदुलकर जन्म

    जिम्मेदारी के लिए अपने नाम की एक गैर सरकारी संगठन भी चलाते हैं दोस्तों आइए बिना आपका समय खराब किए हम सचिन तेंदुलकर के बचपन से लेकर क्रिकेट में उनकी अद्भुत सफलता तक के सफर को शुरू से जानते हैं सचिन रमेश तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल 1973 को राजापुर के एक मिडिल क्लास मराठी फैमिली में हुआ था उनके पिता का नाम रमेश तेंदुलकर था जो एक लेखक और प्रोफेसर थे और उनकी मां का नाम रजनी तेंदुलकर था जो एक इंश्योरेंस कंपनी में काम करती थी यह बहुत कम लोग जानते होंगे कि सचिन तेंदुलकर अपने पिता रमेश तेंदुलकर की दूसरी पत्नी के पुत्र हैं रमेश तेंदुलकर की पहली पत्नी से तीन संताने हुई अजीत नितिन और सविता जो कि तीनों सचिन से बड़े हैं


    सचिन तेंदुलकर का नाम उनके पिता रमेश तेंदुलकर ने अपने प्रिय संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर रखा था सचिन को क्रिकेट का शौक बचपन से ही है लेकिन शुरू से ही वह बहुत ही शरारती बच्चों में गिने जाते थे जिसकी वजह से अक्सर स्कूल के बच्चों के साथ उनका झगड़ा होता रहता था सचिन की शर्तों को कम करने के लिए उनके बड़े भाई अजीत ने उन्हें 1984 में क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन करने का सोचा और रमाकांत आचरेकर के पास लेकर गए

    सचिन कोअकैडमी में ले लिया

    रमाकांत आचरेकर उस समय के प्रसिद्ध पहुंचने के लिए जाते थे लेकिन सचिन पहली बार उनके सामने अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए और आचरेकर ने उन्हें क्रिकेट सिखाने से मना कर दिया लेकिन बड़े भाई अजीत के रिक्वेस्ट पर आज चेक करने फिर से एक बार सचिन का मैच देखा लेकिन इस बार फिर सचिन को एक पेड़ के पीछे से छू कर देख रहे थे और तब सचिन ने बहुत अच्छा मैच खेला था जिससे उन्हें पता चल गया कि सचिन केवल हमारे सामने खेलने में असहज महसूस कर रहे हैं और फिर उन्होंने सचिन को अपने अकैडमी में ले लिया और क्रिकेट दिखाना शुरू कर दिया

    सचिन bat को बहुत पीछे से पकड़ते थे

    आगे चलकर आचरेकर को सचिन के bat पकड़ने के तरीके से प्रॉब्लम थी क्योंकि सचिन bat को बहुत पीछे से पकड़ते थे और आज लेकर के हिसाब से इस तरह से बैठकर करने पर अच्छे शॉट्स नहीं लगाए जा सकते थे इसीलिए उन्होंने सचिन को bat को थोड़ा ऊपर पकड़ कर खेलने का सलाह दिया लेकिन इस बदलाव से सचिन कंफर्टेबल नहीं फील कर रहे थे और इसीलिए उन्होंने आचरेकर से रिक्वेस्ट किया कि उन्हें नीचे बैठ पकड़कर ही खेलने दे दरअसल बचपन में सचिन अपने बड़े भाई के बैट से खेलते थे और उनके छोटे छोटे हाथों से बड़ी बैठ को पकड़ने में बहुत दिक्कत होती थी और वह उस bat को संभालने के लिए बहुत नीचे से करते थे वहीं से उन्हें bat को नीचे पकड़ने की आदत हो गई

    श्रद्धा आश्रम विद्या मंदिर में पढ़ाई

    आचरेकर तेंदुलकर की प्रतिभा से बहुत ही प्रभावित थे और इसीलिए उन्होंने सचिन को श्रद्धा आश्रम विद्या मंदिर में पढ़ाई के लिए शिफ्ट होने के लिए कहा क्योंकि वहां पर क्रिकेट की बहुत अच्छी टीम थी और उन्होंने देखा था कि सचिन को अगर एक अच्छा माहौल मिले तो भूख भी कर सकते हैं तेंदुलकर ने भी अपने कोच के कहने पर उस स्कूल में एडमिशन ले लिया और एक प्रोफेशनल टीम के साथ क्रिकेट

    खेलने लगे वह वहां पढ़ाई के साथ-साथ शिवाजी पार्क में रोज सुबह शाम असर की देखरेख में प्रैक्टिस करते थे सचिन को प्रैक्टिस कर आते समय उनकी कोस्टम पर एक कर देते थे और दूसरे खिलाड़ियों को कहते थे कि वह सचिन को बॉलिंग करें जो खिलाड़ी सचिन को आउट कर देगा सिक्का उसका अगर सचिन को कोई भी खिलाड़ी आउट न कर सका तो सीखता सचिन का होता था सचिन के पास आज भी उनमें से 13 सिक्के हैं जिन्हें सबसे बड़ा इनाम मानते हैं सचिन के मेहनत और प्रैक्टिस के दम पर उनका खेल बहुत ही जल्दी निकल गया और वह लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गए उन्होंने अपनी स्कूल टीम की तरफ से मैच खेलने के साथ ही साथ मुंबई के प्रमुख लोगों से भी खेलना शुरू कर दिया शुरू शुरू में

    डेनिस लिली का सुझाव

    सचिन को बॉलिंग का बहुत शौक था जिसकी वजह से  1987 ma 14 साल की उम्र में बॉलिंग सीखने के लिए मद्रास के ऑडिशन जहां ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज डेनिस लिली training देते थे लेकिन उन्होंने सचिन को बैटिंग सीखने का सुझाव दिया 

    विकी हुआ बैटिंग में अच्छा परफॉर्मेंस कर रहे थे और फिर सचिन ने भी उनकी बात मान ली और फिर अपनी बैटिंग की तरफ ज्यादा ध्यान देने लगे दोस्तों बता दूं कि ले ली ने जिन खिलाड़ियों को तेज गेंदबाज बनने से मना किया उसमें सौरव गांगुली भी शामिल थे कुछ महीनों के बाद बेस्ट जूनियर क्रिकेट अवार्ड मिलने वाला था जिसमें 14 साल के सचिन की बड़ी दावेदारी मानी जा रही थी लेकिन उन्हें वह इनाम नहीं मिला जिससे वह बहुत दुखी हुए और

    गावस्कर के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ दिया

    तभी उनका मनोबल बढ़ाने के लिए पूर्व भारतीय बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने उन्हें अपने पद की 1 जोड़ी दे दी तेंदुलकर ने लगभग 20 साल बाद 34 टेस्ट शतक कि गावस्कर के विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने

    के बाद इस बात का जिक्र किया था उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए उस समय प्रोत्साहन का सबसे बड़ा स्रोत था 14 नवंबर 1987 को तेंदुलकर को रणजी ट्रॉफी के लिए भारत के घरेलू फर्स्ट क्लास क्रिकेट टूर्नामेंट में मुंबई की तरफ से खेलने के लिए सिलेक्ट किया गया लेकिन वह अंतिम 11 में किसी भी मैच में उनका इस्तेमाल उस पूरी सीरीज में प्लेसमेंट के लिए किया गया था

    नाबाद प्रथम शतक

    1 साल बाद 11 दिसंबर 1988 को सिर्फ 15 साल और 232 दिन की उम्र में तेंदुलकर ने अपने कैरियर की शुरुआत मुंबई की तरफ से खेलते हुए गुजरात के खिलाफ जिसमें उन्होंने नाबाद शतक बनाया और फर्स्ट क्लास में अपने पहले ही मैच में शतक बनाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी और 1988 के बीच में मुंबई की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने उसके बाद भी उनकी शानदार फॉर्म जारी रही और उन्होंने दिल्ली के खिलाफ में भी नाबाद शतक बनाया उस समय विशेष भारत के लिए खेल रहे थे

    रणजी दलीप और ईरानी ट्रॉफी में अपने पहले ही मैच में शतक

    सचिन तेंदुलकर ने रणजी दलीप और ईरानी ट्रॉफी में अपने पहले ही मैच में शतक जमाया था और ऐसा करने वाले भारत के एकमात्र बल्लेबाज हैं उनका यह रिकॉर्ड आज तक कोई नहीं तोड़ पाया है सचिन के जादुई खेल को देखते हुए सिर्फ 16 साल की उम्र में उनका सिलेक्शन भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में किया गया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके सिलेक्शन का श्री राज सिंह डूंगरपुर को दिया जाता है जो कि उस समय थे तेंदुलकर नवंबर 1989 में सिर्फ 16 साल और 205 दिनों की उम्र में कराची में पाकिस्तान के खिलाफ अपने टेस्ट कैरियर की शुरुआत की

    पाकिस्तान के खिलाफ पहला मैच

    इससे पहले भी भारतीय चयन समिति ने वेस्टइंडीज के दौरे के लिए सचिन के सिलेक्शन की इच्छा जताई थी लेकिन वह नहीं चाहते थे कि सचिन को इतनी जल्दी वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों का सामना करना पड़े और इसीलिए उन्होंने सचिन को थोड़ा और समय दे दिया था कराची में सचिन ने इंडिया क्रिकेट टीम की तरफ से पाकिस्तान के खिलाफ पहला मैच खेलते हुए 15 रन बनाए इसी सीरीज के एक मैच में सचिन के नाम

    पर गिर गई थी जिसकी वजह से उनकी नाक से खून आ गया लेकिन फिर भी वो रुके नहीं और पूरा मैच खेला उस मैच में उन्होंने 54 रन बनाए थे सचिन ने 1993 में अपना पहला घरेलू टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ भारत में खेला जो उनका टेस्ट मैच इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट मुकाबलों में भी सचिन का प्रदर्शन बहुत ही जबरदस्त रहा हालांकि सचिन को एकदिवसीय मैच में अपना पहला शतक लगाने के लिए 79 मैचों का इंतजार करना पड़ा था लेकिन एक बार ले में आने के बाद सचिन ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने जादुई बल्लेबाजी

    से क्रिकेट जगत की सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया सचिन एकमात्र खिलाड़ी हैं जिनके खाते में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर में 100 शतक बनाने का विश्व रिकॉर्ड है उन्होंने रिकॉर्ड 51 शतक टेस्ट क्रिकेट में और 49 शतक वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में बनाए हैं एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास में दोहरा शतक जड़ने वाले पहले खिलाड़ी हैं साथ ही साथ सचिन सबसे ज्यादा वन डे इंटरनेशनल क्रिकेट मैच खेलने वाले खिलाड़ी हैं उन्होंने 463 वनडे खेले हैं

    राजीव गांधी खेल रत्न

    सचिन को क्रिकेट में उनकी अद्भुत योगदान के लिए उन्हें बहुत सारे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है 1997 में खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया गया उसके बाद 1999 में उन्हें पद्मश्री और 2008 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है 2013 में भारतीय डाक विभाग ने उनके नाम का डाक टिकट जारी किया इस सम्मान से सम्मानित होने वाले एकमात्र क्रिकेटर हैं 2014 मे सचिन को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया

    सचिन ने वनडे क्रिकेट से संन्यास

    भारत रत्न से सम्मानित होने वाले पहले खिलाड़ी वनडे क्रिकेट में बल्लेबाजी के लगभग सभी रिकॉर्ड अपने नाम करने के बाद 23 दिसंबर 2012 को सचिन ने वनडे क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी और 16 नवंबर 2013 को अपने घरेलू मैच वानखेड़े स्टेडियम में अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला इस टेस्ट मैच को जीतकर भारतीय टीम ने उन्हें भावपूर्ण विदाई दी

    अंजली तेंदुलकर से शादी

    अगर सचिन की बात करें तो 1995 में उन्होंने अंजली तेंदुलकर से शादी की उनके दो बच्चे भी हैं जिनका नाम सारा और अर्जुन है सचिन अपने शांत और सरल स्वभाव के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है गुस्से में आकर भी कोई टिप्पणी करने की बजाय किसी टिप्पणी का जवाब अपने बल्ले से देने में विश्वास रखते थे दोस्तों सचिन ने क्रिकेट में भगवान का दर्जा अपनी मेहनत अपनी कोशिश अपनी लगन से हासिल की उन्होंने क्रिकेट को इस तरह खेला वह सिर्फ खेलना कर आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद 


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